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Mahatma Gandhi Speech In Hindi Part - II

आदरणीय प्रधानाचार्य, उप-प्रधानाचार्य, प्रिय साथियो और प्यारे छात्रो आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।




मैं कृष्ण मुर्ति, उच्च माध्यमिक विद्यालय का शिक्षक आप सभी का इस अर्ध-वार्षिक सांस्कृतिक समारोह में हार्दिक स्वागत करता हूँ। मुझे उम्मीद है की हमारे समस्त छात्र और शिक्षक इस कार्यक्रम  का हिस्सा बनकर रोमांचित होंगे क्योकिं यह रोज के बोरियत भरे कार्यक्रमो से हटकर है जो इस पुरे माहैल में उत्साह भरने का कार्य करता है। इससे पहले की हम इस कार्यक्रम का शुभआरंभ करे आइये भारत के महान क्रांतिकारियो में से एक महात्मा गाँधी को स्मरण करते है, जिनका हमारे देश के आजादी में बहुत बड़ा योगदान है।

महात्मा गाँधी पर भाषण देने का कारण य़ह है कि मैं स्वंय उनके मूल विचारो और अंहिसावादी नीति से बहुत ज्यादे प्रभावित हूँ।


उनके जैसे महान व्यक्तियों के अथक प्रयासो के वजह से ही आज हम एक संगठित और आजाद राष्ट्र के रुप में खड़े है। जिन्होनें किसी भी कीमत पर अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से इंकार कर दिया और हर हाल में विजयी साबित हुए।

उनका व्यक्तित्व एक अलग तरह का ही था। उन्होने अपना सारा जीवन सत्य को समर्पित कर दिया इसके साथ ही उन्होंने अपने आंनदोलन का नाम भी सत्याग्रह रखा, जिसका अर्थ है सत्य पे भरोसा रखना या बने रहना। सन् 1920 में सत्याग्रह आंदोलन राजनैतिक रुप से अस्तित्व में आया इसी के अंतर्गत उन्होंने सितम्बर महीनें में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बैठक से पूर्व उन्होंने असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव सबके सामने रखा। उनके सत्याग्रह के विचार ने लोगो के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा और उनके इन्ही विचारो से वह लोगो में एक महान आध्यात्मिक नेता, बापू के रुप में प्रसिद्द हुए।




उन्होंनेकहा कि, एक व्यक्ति के लिये यह बहुत जरुरी है की वह हमेशा खुद की बुराईयों, असुरक्षा और भय से लड़े। गाँधी जी ने पहले अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा था की ईश्वर ही सत्य है, लेकिन बाद में उन्होंनेइसे बदलते हुए कहा कि सत्य ही ईश्वर है। इस तरह से गाँधी जी के अनुसार  सत्य स्वंय ईश्वर है। इसके लिये उन्होने रिचार्ड द्वारा कहे गये एक कथन का सहारा लिया, जिसमे उन्होने कहा कि ईश्वर सत्य से भिन्न नही है, और आत्मा के रुप में वह संसार के हर जीवित वस्तु में मौजूद है। यदि निकोलस गैर के शब्दो में कहें तो “संसार के हर जीवित वस्तु में आत्मा मौजूद है और उसे समानता का अधिकार है।” दुसरे शब्दो में कहा जाये तो आत्मा इस पूरे संसार में समाहित है और उसे अहिंसा के नियम द्वारा महसूस किया जा सकता है।

तो छात्रों इससे हमे यह शिक्षा मिलती है की हिंसा से कुछ भी हासिल नही होता इसलिये हमें एक-दूसरे के साथ प्रेम और सौहार्द के साथ रहना चाहिये, क्योकि हम सब एक ही ईश्वर की संतान है। जिससे यह संसार और भी सुंदर जगह बन सके और यह महात्मा गाँधी जैसी महान आत्मा के लिये भी एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।




तो अब मैं आप सब से अपने इस भाषण का अंत करने की अनुमति चाहूंगा और अपने अन्य साथियों से निवेदन करूँगा की वह मंच पर आयें और इस समारोह को आगे बढ़ाने की कृपा करे।

धन्यवाद!
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