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महात्मा गाँधी पर भाषण -III

आप सभी को नमस्कार मैं अश्विन चावला, आज के इस भाषण समारोह में तहेदिल से आप सभी का स्वागत करता हूँ।

मुझे आज की शाम इस अवसर पर मेजबानी करते हुए वाकई काफी खुशी महसूस हो रही है और आज मैं महात्मा गाँधी पर एक छोटा सा भाषण दूंगा। जैसा की आप सब जानते है कि महात्मा गाँधी की जंयती आ रही है, इसलिये हमारे समूह ने निर्णय लिया कि हम देश के महान क्रांतिकारियो में से एक महात्मा गाँधी की याद में एक छोटे से समारोह का आयोजन करेंगे।




मैँ स्वंय व्यक्तिगत रुप से महात्मा गाँधी के अंहिसा नीति से प्रभावित हूँऔर उनके इसी अंहिसावादी मार्ग से प्रभावित होकर लाखो भारतीयो ने उनके साथ मिलकर अंग्रजो को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया। यह कहने की कोई जरुरत नही है कि वह भारत के स्वतंत्रा संर्घष के सबसे उत्कृष्ट नायको में से एक थे। जिसके लिये उन्होंने“सविनय अवज्ञा आंदोलन” जैसे अंहिसावादी मार्गो और आंदोलनो का चुनाव किया जोकि पूरे विश्व के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना।



दुर्भाग्य से, उनके जैसे महान व्यक्ति को भी अशांत और बुरे दौर का सामना करना पड़ा सन् 1932 में उन्हे सलाखो के पीछे कैद कर दिया गया। उनके कारावास के पीछे कारण यह था कि वह ब्रिटिशो द्वारा देश के सबसे निचले तबके यानि दलितो को चुनावो मे अलग निर्वाचन क्षेत्र देने के विरोध में 6 दिनो के भूख हड़ताल पर चले गये थे। हालांकि सार्वजनिक बहिष्कार के चलते अंग्रेजो को अपने फैसले पर दोबारा सोचने के लिये विवश होना पड़ा।




उन्होने कभी भी अपना जीवन सुख से नही जीया लेकिन वह हमारे समाज में फैली बुराईयो को दूर करने के लिये सदैव तत्पर रहे। तो आइये हम उनके जैसे महान व्यक्ति की याद में कुछ समय बिताते है और उनके उन महान कार्यो से प्रेरणा लेते है, जो वह हमारे लिये पीछे छोड़ गये है।

धन्यवाद!
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